भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के बारे में कुछ मुख्य  विशेषताओ की जानकारी

किसी भी देश का विकास उस देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भर होता है| यदि देश की अर्थव्यवस्था अच्छी है, तो देश तीव्र गति से आगे बढेगा और यदि देश की अर्थव्यवस्था अच्छी नही है, तो वह विकास की गति स्वतः धीमी हो जाएगी| अर्थव्यवस्था दो शब्दों से मिलकर बना है, अर्थ और व्यवस्था | अर्थ का तात्पर्य है मुद्रा अर्थात् धन और व्यवस्था का अर्थ है एक स्थापित कार्यप्रणाली। इस शब्द का सबसे प्राचीन उल्लेख कौटिल्य द्वारा लिखित ग्रन्थ अर्थशास्त्र में मिलता है। अर्थव्यवस्था अर्थशास्त्र की अवधारणाओं और सिद्धांतों का व्यवहारिक कार्य रूप है। अर्थव्यवस्था वह सरंचना है, जिसके अंतर्गत सभी आर्थिक गतिविधियां का संचालन होता है। उत्पादन उपभोग व निवेश अर्थव्यवस्था की आधारभूत गतिविधियां है। 

 

अर्थव्यवस्था की परिभाषा

 अर्थव्यवस्था एक ऐसा तंत्र है, जिसके अंतर्गत विभिन्न आर्थिक क्रियाओ, संस्थागत क्रियाओं एवं उसके क्रियात्मक संबंधों का अध्ययन किया जाता है| इन आर्थिक क्रियाओं के अंतर्गत उत्पादन, उपभोग, विनिमय, वितरण, बचत, निवेश सम्मिलित है| भारत को स्वतंत्र हुए 73 वर्ष हो चुके हैं, और इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में ज़बरदस्त बदलाव आया है। औद्योगिक विकास ने अर्थव्यवस्था का रूप बदल दिया है। आज भारत की गिनती दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में होती है। विश्व की अर्थव्यवस्था को चलाने में भारत की भूमिका बढ़ती जा रही है। आईटी सॅक्टर में पूरी दुनिया भारत का लोहा मानती है। full form in hindi

भारत की अर्थव्यवस्था

क्रय मूल्य शक्ति (PPP) के अनुसार आज भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुसार आज भारत अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन के बाद दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इसमें फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश को पीछे छोड़ दिया है| वर्तमान समय में भारत विकासशील देशों में सबसे तेजी से विकास कर रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था उभरती हुई अर्थव्यवस्था कही जाती है, क्योंकि अभी यहां पर बहुत ही संभावनाएं शेष हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं

भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है –

1.भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान

भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसँख्या गांव में निवास करती है, जो पूर्ण रूप से कृषि पर निर्भर है, अर्थात कृषि कार्य करती है । भारत की अर्थव्यवस्था पर कृषि का प्रभाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से पड़ता है। सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी का 30 प्रतिशत कृषि क्षेत्र से ही प्राप्त होता है। कृषि को देश की रीढ़ भी कहा जाता है। भारत में कृषि के अंतर्गत फल, अनाज, सब्जियों के साथ पशुपालन के उद्योग धंधे भी शामिल है।

2.मिश्रित अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है, क्योंकि यहां सार्वजनिक और निजी दोनों ही प्रकार के उद्योग धंधे साथ में काम करते हैं। भारत में विदेशी कंपनियों के लिए फैक्ट्री, उद्योग, धंधे लगाने की अनुमति दी गयी, जिसके बाद से भारत का प्राइवेट सेक्टर बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। कुछ बुनियादी चीजों जैसे रेलवे, हवाई जहाज, सैन्य हथियारों का निर्माण, रक्षा क्षेत्र से संबंधित उद्योगों में सरकारी सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है।

3.उभरती हुई अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था को उभरती हुई अर्थव्यवस्था कहा जाता है, क्योंकि अभी यहां अनेक सेक्टर्स का विकास होना बाकी है, जबकि यहां संभावनाएं बहुत अधिक हैं। विकसित देशों में विकास पूरा हो चुका है, और नए विकास की कोई संभावना नहीं है।

वर्ष 2018 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास प्रतिशत  7.3% था। जो विश्व के अन्य देशों की तुलना में काफी अच्छा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है, कि भविष्य में भारत की अर्थव्यवस्था बहुत आगे जाएगी।

4.कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर असंतुलन

भारत की अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषता यह है, कि यहां कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच संतुलन बहुत ही बेहतर है।

5.भारतीय अर्थव्यवस्था में तकनीक का उपयोग कम

देश की अर्थव्यवस्था में तकनीकी का उपयोग कम हो रहा है, जबकि मानव श्रम का प्रयोग अधिक हो रहा है| जिसके कारण  वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है। विश्व की दूसरी विकसित अर्थव्यवस्थाओं जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन में लगभग कार्यों में तकनीक का प्रयोग किया जाता है। यदि भारत को विश्व में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करना है, तो उद्योग धंधों और कृषि में तकनीकी का उपयोग बढ़ाना होगा।

6.धन वितरण में असमानता

भारत की अर्थव्यवस्था में धन वितरण में असमानता अधिक देखने को मिलती है। अमीर और गरीब के बीच काफी गहरी खाई है। देश में कुछ लोगों के धन काफी बड़ी मात्रा में है, और शेष जनता गरीबी की समस्या से ग्रसित है, जो लोग धनी है वह और धनी  बनते जा रहे हैं। गरीब और गरीब होता जा रहा है।

7.जनसँख्या की अधिकता

वर्तमान में भारत की जनसँख्या लगभग 137 करोड़ से अधिक हो चुकी है। भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता है, कि यहां पर बड़ी मात्रा में आबादी है।  जनसंख्या के मामले में भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा देश है। बड़ी मात्रा में लोगों को रोजगार देना एक बड़ी चुनौती है। बड़ी जनसंख्या के कारण गरीबी में भी बढ़ोतरी हो रही है। यदि भारत अपने संसाधनों का उपयोग सही तरह से करें तो यह विश्व में महाशक्ति बन सकता है।

8.स्थिर मैक्रो अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व में सबसे स्थिर मैक्रो अर्थव्यवस्था माना जाता है। भारत में कारोबार और व्यापार की संभावनाएं बेहतर हैं, जिसके कारण अन्य बाहरी देश यहां अपनें उद्योग धंधे स्थापित कर रहे हैं।

9.रोज़गार के अपर्याप्त अवसर

भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी । भारत की जनसँख्या लगभग 137  करोड़ है, जिसमें 60 प्रतिशत युवा है और कार्य करने योग्य है,  इसके बावजूद देश में बड़ी मात्रा में बेरोजगारी है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में भारत में बेरोजगारी 1.77 करोड़ थी।

10.बुनियादी ढांचे का अभाव

भारत की अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे का अभाव है। हालाँकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें तेजी से सुधार हुआ है, परन्तु अभी भी बहुत से क्षेत्रों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है। भारत को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बननें के लिए अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। अभी भी देश के बहुत से क्षेत्रो में बिजली, पानी, सड़क, सीजर, यातायात के संसाधन, शौचालय, घर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।